Hi Friends, these are not my poems I've received through mails and i just want share them with all of you.
Wednesday, August 27, 2008
तुम्हे चूमने के लिए उठता हूँ
तुम समन्दर का किनारा हो मैं एक प्यासी लहर की तरह तुम्हे चूमने के लिए उठता हूँ तुम तो चट्टान की तरह वैसी ही खड़ी रहती हो मैं ही हर बार तुम्हे बस छू के लौट जाता हूँ
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