Monday, June 18, 2012

मैं कैसे समझूँ

मैं कैसे समझूँ बिना कहे .. कैसे बिना .. रहूँ कहे .. कैसे बीते दिन बिरहा में.. कैसे तुम बिन .. ये दर्द सहे कैसे बंधाऊँ... धीर ह्रदय को .. कैसे दिखाऊं अपने भाव पूछु कैसे तुमसे यूँ ही इतने दिन मुझ बिन तुम कैसे रहे तुम कहते हो अपनों से क्या कहना पर मुझे अखरता तेरा चुप रहना चाहती हूँ ..बैठो कुछ पल तो पास जाहिर करो , अपने छुपे जज़्बात और पूछो ..खुल के कहो जरा तो कैसे किया मुझे तुमे याद पूछों कैसे सूनी आँखों से .... अविरल कितने आंसूं है बहे ....

हम भूलते रहे याद आती रही


Wednesday, May 16, 2012

हो किसी का प्यार लेकिन, प्यार वो मेरा नहीं है

टेक कर घुटने, झुका सिर, प्रेम का जो दान माँगे
हो किसी का प्यार लेकिन, प्यार वो मेरा नहीं है।

रख न पाया मान निज जो, प्यार वो कैसे करेगा?
हीनता से ग्रस्त है जो, दीनता ही दे सकेगा
द्वार पर तेरे खड़ा हूँ, स्नेह का लेकर निमंत्रण
एक चुटकी भीख को यह दीन का फेरा नहीं है
हो किसी का प्यार लेकिन, प्यार वो मेरा नहीं है

है विदित, होती रही है प्यार की उद्दाम धारा
बँध सके जो बंधनों से और ना निज कूल से
राह में अवरोध कोई सर उठाए
यह झुका दे, तोड़ दे, ढाये उखाड़े मूल से
है अगर यह प्यार तो आश्वस्त हूँ मैं
इस प्रभंजन ने प्रबल, यह मन मेरा घेरा नहीं है
हो किसी का प्यार लेकिन प्यार वो मेरा नहीं है

प्यार वो है ले बहे जो, मंद मंथर गति निरंतर
जी उठे स्पर्श पाकर हाँफती मरुभूमि बंजर
मान रखता, मान देता, मधुर मंगल रूप कोमल
प्यार का जो स्वप्न मेरा क्या वही तेरा नहीं है?
टेक कर घुटने, झुका सिर, प्रेम का जो दान माँगे
हो किसी का प्यार लेकिन , प्यार वो मेरा नहीं है।