मैं कैसे समझूँ
बिना कहे ..
कैसे बिना ..
रहूँ कहे ..
कैसे बीते दिन
बिरहा में..
कैसे तुम बिन ..
ये दर्द सहे
कैसे बंधाऊँ...
धीर ह्रदय को ..
कैसे दिखाऊं
अपने भाव
पूछु कैसे
तुमसे यूँ ही
इतने दिन
मुझ बिन
तुम कैसे रहे
तुम कहते हो
अपनों से क्या कहना
पर मुझे अखरता तेरा
चुप रहना
चाहती हूँ ..बैठो
कुछ पल तो पास
जाहिर करो ,
अपने छुपे जज़्बात
और पूछो ..खुल
के कहो जरा तो
कैसे किया मुझे
तुमे याद
पूछों कैसे
सूनी आँखों से ....
अविरल कितने आंसूं
है बहे ....
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